May 21, 2024
Indian Law on Live in Relationship

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Live-in relationship पर भारतीय कानून क्या है | Indian Law on Live in Relationship

लिव इन रिलेशनशिप यानि के दो वयस्कों का बिना शादी के एक साथ रहना। इसमें दो कपल बिना शादी के एक साथ रह सकते हैं यहां कोई सालों की वैधता भी नहीं होती। यही लिव इन रिलेशनशिप कहलाता है। हालाँकि भारतीय कानून में इसके अलग से कोई प्रावधान नहीं किये गए हैं लेकिन अनुछेद 21 यानि हर व्यक्ति कोई कानून आजादी दी गयी जो अपनी इच्छा अनुसार चाहे करे। इसी अनुछेद में लिव इन रिलेसनशिप को जोड़ा गया है।

सर्वोच्च न्यालय ने साल 1978 में एक ऐसे केस में इस शब्द का पहली बार प्रयोग किया था जब 50 सालों से एक साथ रह रहे कपल को विवाह जैसी क़ानूनी वैधता देने की बात आई थी। तब उस समय की पीठ ने कहा था कि इस तरह की रिलेशनशिप को किसी भी कानून का उलघन नहीं मान सकते न ही ये कोई जुर्म है। लिहाजा इसे वैध माना जायेगा। सर्वोच्च न्यालय ने कहा कि इसे विवाह की तरह ही माना जायेगा। Indian Law on Live in Relationship

कोई विशिष्ट कानून नहीं: भारत में लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने वाला कोई समर्पित कानून नहीं है। इसका मतलब यह है कि जो जोड़े बिना शादी किए एक साथ रहना चुनते हैं, वे शादी से संबंधित विशिष्ट कानूनी प्रावधानों से बंधे नहीं हैं।

महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने लिव-इन संबंधों को वैध माना है और विशेष रूप से महिलाओं के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा उपाय प्रदान किए हैं। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाएं घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 सहित विभिन्न कानूनों के तहत वित्तीय सहायता, विरासत अधिकार और घरेलू हिंसा से सुरक्षा की हकदार हैं।

रिश्ते की अवधि: हालांकि कोई विशिष्ट समय सीमा परिभाषित नहीं है, एक महत्वपूर्ण अवधि के लिए एक साथ रहना अक्सर वैध लिव-इन रिलेशनशिप का प्रमाण माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि “विवाह की प्रकृति का रिश्ता” वह होगा जहां एक पुरुष और एक महिला एक जोड़े के रूप में एक साथ रह रहे हैं, और उन्हें “काफी अवधि” तक एक साथ रहना होगा।

लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों से पैदा होने वाले बच्चों को विवाह से पैदा हुए बच्चों के समान अधिकार होते हैं। उन्हें अपने माता-पिता से भरण-पोषण और विरासत का अधिकार है।

भरण-पोषण: यदि रिश्ता टूट जाता है, तो लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला साथी आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 और घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत भरण-पोषण के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

संपत्ति के अधिकार: लिव-इन रिलेशनशिप में भागीदारों के संपत्ति के अधिकार जटिल हो सकते हैं और विशिष्ट परिस्थितियों पर निर्भर हो सकते हैं। साझेदारों के पास संपत्ति का अधिकार हो सकता है यदि उन्होंने संयुक्त रूप से संपत्ति अर्जित की है या वित्तीय योगदान दिया है।

पंजीकरण: सरकारी अधिकारियों के साथ लिव-इन रिलेशनशिप को पंजीकृत करने की कोई आवश्यकता नहीं है। विवाहों के विपरीत, जिन्हें अक्सर कानूनी मान्यता के लिए पंजीकरण की आवश्यकता होती है, लिव-इन रिश्तों को ऐसी औपचारिकताओं की आवश्यकता नहीं होती है।

सामाजिक स्वीकृति: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हालांकि लिव-इन रिश्तों को कानूनी सुरक्षा मिल सकती है, फिर भी उन्हें भारतीय समाज में सामाजिक कलंक और अलग-अलग डिग्री की स्वीकृति का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सांस्कृतिक मानदंड और दृष्टिकोण व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं।

कृपया ध्यान रखें कि कानून बदल सकते हैं, और व्याख्याएं विशिष्ट मामलों और अधिकार क्षेत्र के आधार पर भिन्न हो सकती हैं। भारत में लिव-इन रिलेशनशिप पर सबसे नवीनतम और सटीक कानूनी सलाह के लिए, एक योग्य वकील से परामर्श करने की सलाह दी जाती है जो पारिवारिक कानून में विशेषज्ञ हो। Indian Law on Live in Relationship

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क्या शादीशुदा पुरुष लिव इन रिलेशनशिप में रह सकता है

भारतीय कानून के अनुसार, एक शादीशुदा पुरुष या महिला लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकता है, लेकिन इस पर कुछ विशेष नियम और कर्मचारी उल्लंघनों का खतरा होता है। यहां कुछ मुख्य बातें हैं:

धार्मिक और सामाजिक प्रेस्शर: भारतीय समाज में शादीशुदा पुरुष या महिला का लिव-इन रिलेशनशिप में होना सामाजिक और धार्मिक प्रेस्शर के साथ आ सकता है।

कानूनी प्राधिकृति: कानूनी रूप से, भारत में शादीशुदा पुरुष या महिला का लिव-इन रिलेशनशिप वैध माना जाता है, लेकिन यह स्थिति किसी भी कानूनी संघर्ष के लिए कारण बन सकती है, खासकर यदि इसके परिणामस्वरूप शादीशुदा जीवन को खतरे में डालती है।

अदृश्य और अविश्वसनीयता: एक शादीशुदा व्यक्ति का लिव-इन रिलेशनशिप स्थायीता और सुरक्षा के साथ नहीं हो सकता है, क्योंकि यह स्थिति छुपाई जाने वाली और अविश्वसनीय हो सकती है।

अवैध संबंधों से बचाव: शादीशुदा पुरुष या महिला को संबंधित कानूनों का पालन करना चाहिए, और अवैध रिश्तों से बचने के लिए सावधान रहना चाहिए।

सम्बंधों की स्थिति: सम्बंध कितने समय से चल रहे हैं, यह कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। एक समय समय परीक्षण से यह तय किया जा सकता है कि आपका संबंध “विवाह की तरह की स्थिति” में है या नहीं।

कृपया याद दिलाएं कि कानूनी मुद्दों से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आपको किसी विशेषज्ञ वकील से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि कानून में बदलाव हो सकते हैं और स्थितियाँ व्यक्ति और स्थान के हिसाब से भिन्न हो सकती हैं।


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