February 23, 2024
Difference Between IPC and CRPC in hindi

Difference Between IPC and CRPC in hindi

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Difference Between IPC and CRPC in hindi | CRPC , IPC व CPC क्या होती है। Indian Penal Code

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भारतीय सविधान : Difference Between IPC and CRPC in hindi

भारतीय सविधान को 395 बिंदुओं में लिखा गया है जिन्हे अनुछेद या आर्टिकल कहा जाता है। इसी तरह देश के कानून को भी अलग पार्ट में लिखा गया है ताकि किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो। जिन पार्ट में कानून विभाजित किया गया है उन्हें सीआरपीसी , आईपीसी व सीपीसी कहा जाता है। आगे इनके भी कुछ बिंदु बने हुए हैं जिन्हे धारा या सेक्शन कहा जाता है।

क्या होते हैं सीआरपीसी 164 के बयान , धारा 164 के बयान कैसे दर्ज़ होते हैं

अर्थात जैसे किसी दोषी को पुलिस गिरफ्तार करती है तो वो सीधे तोर पर उसके किये क्राइम को देखते हुए कानून में उसके क्राइम की धारा देखती है फिर उसी के अनुसार आगे की कार्यवाई करती है।

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सीपीसी(CPC) क्या होती है : What is CPC in Hindi

सिविल मामले जो भी होते हैं उन्हें सिविल कोर्ट , सिविल कोड के तहत देखा जाता है जिन्हे सिविल प्रोसीजर कोड भी कहा जाता है। ये मामले पैसों से सबंधित या किसी तरह जमीन जायदाद , या किसी तरह के अग्रीमेंट जैसे लोन एग्रीमेंट , जमीन अग्रीमेंट , या कोई रेंट अग्रीमेंट जैसे मामले इसी कानून के तहत देखे जाते हैं। इनमे ज्यादतर मामलों में जुर्माने का प्रावधान होता है। Code of Criminal Procedure

आईपीसी(IPC) क्या होती है : What Is Indian Penal Code IPC

आईपीसी यानि इंडियन पीनल कोड (Indian Penal Code) जिसे भारतीय दंड सहिंता भी कहा जाता है। ये भारतीय कानून की जुर्म के खिलाफ सबसे मजबूत कड़ी है जिसके तहत हत्या , बलात्कार , फिरौती डकैती , लूटपाट , मारपीट जैसे संगीन जुर्म आते हैं ये फौज़दारी अदालत के तहत सुने जाते हैं। इनमें कठोर सजा व जुर्माने का प्रावधान है। भारतीय दण्ड सहिंता को ताजी रात ए हिन्द भी कहा जाता है। भारतीय दण्ड सहिंता में कुल 511 धाराएं हैं।

आईपीसी के तहत ही पुलिस किसी क्रिमिनल को गिरफ्तार करती है। इसी सहिंता के तहत दोषी को उसके जुर्म की सजा मुकर्रर की जाती है। भारतीय दण्ड सहिंता 1860 में बनाई गयी थी।

सीआरपीसी (Crpc)क्या होती है : What is CrPc hindi

सीआरपीसी CRPC यानि क्रिमनल प्रोसीजर कोड इसमें बचाव पक्ष के लिए प्रावधान किये गए हैं। यानि पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार करती है तो वह भारतीय दण्ड सहिंता के तहत कोई भी धारा उसपर लगा देती है जो उसके जुर्म से सबंधित है। इसी तरह जब ये मामला कोर्ट में जाता है तो कोर्ट उस केस को सीआरपीसी के तहत देखती है।

यानि इसमें किसी भी दोषी को अपनी तरफ से बचाव पक्ष रखने का मौका मिलता है उसको अपनी बेगुनाही साबित करने का भी मौका मिलता है वहीं पुलिस भी कोर्ट में अपनी बहस करती है। पुलिस कोर्ट में उस दोषी के जुर्म सबंधित सबूत कोर्ट में पेश करती है जो ये सब पुलिस व कोर्ट के बीच का प्रोसीजर चलता है ये काफी लम्बा भी चल सकता है इसे सीआरपीसी के तहत देखा जाता है।

 


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