July 14, 2024
Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians

Nepal News Today Hindi

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नेपाली प्रधानमंत्री ने ली 5000 नागरिकों की हत्या की जिम्मेदारी, सुप्रीम कोर्ट में होगी पेशी

काठमांडू : Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians -नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल प्रचंड एक नई मुसीबत में फसते नज़र आ रहे हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने एक नरसंहार मामले में पेश होने को कहा है। दरअसल, नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड ने जनवरी साल 2020 में काठमांडू में आयोजित एक सर्वजनक कार्यक्रम में ये बात कबूली थी कि मैं 5000 हज़ार नेपाली नागरिकों की हत्या के लिए जुम्मेदार हूँ इनकी जुम्मेदारी लेता हूँ।

 

Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians
Pushpa-Kamal-Dahal Nepali PM

बता दें कि नेपाल में सरकार बने अभी कोई ज्यादा समय नहीं हुआ है एक तरफ प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल प्रचंड के लिए सरकार बचाना मुश्किल हो गया है दूसरी और उनके पुराने बयान ने उनके लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है उनके इस बयान के खिलाफ दो अलग अलग रिट दायर की गयी हैं जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 9 मार्च को पेश होने के लिए कहा है। उन्हें सुनवाई के दौरान सुबह दस बजे कोर्ट में हाज़िर होने के लिए वारंट जारी किया गया है।

याचिककर्ता कल्याण बुढाथोकी ने कहा कि प्रधानमंत्री प्रचंड ने खुद सर्वजनिक कार्यक्रम में 5000 लोगों के हत्या की बात काबुली थी इस लिए उनके खिलाफ ये मामला दर्ज़ किया गया है। बतानेयोग्य है कि प्रधानमंत्री प्रचंड के आदेश पर ही नरसंहार हुआ था जो युद्ध के नियमो के खिलाफ था। तीन साल पहले 15 जनवरी 2020 को काठमांडू में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रचंड ने माओवादियों द्वारा चलाए गए सशस्त्र विद्रोह के दौरान मारे गए 17 हजार लोगों में से 5000 नागरिकों की हत्या की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी।Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians

क्या है मामला-Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians

मामला करीब 17 साल पुराना है जब नेपाल में 13 फरवरी 1996 को एक विद्रोह हुआ था। यह विद्रोह 21 नवंबर 2006 को सरकार के साथ व्यापक शांति समझौता होने के बाद आधिकारिक तौर पर खत्म हुआ था. एक दशक तक चले इस संघर्ष में कई हजार लोगों की मौत हुई थी।Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians

Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians
Nepali PM

उस वक्त महोवादी हथियारों के दम पर नेपाल की सत्ता पर काबिज़ होना चाहते थे। उस वक्त उनकी कमान प्रचंड के हाथ में थी। वो पुष्पकमल प्रचंड ही थे जिनके एक इशारे पर हज़ारों हत्याएं हुई थी। इस दौरान सरकारी अधिकारीयों पर व उनकी सम्पति को भी नुकसान पहुंचाया था । बाद में जब यह संघर्ष थमा और राजशाही खत्म हुई तब प्रचंड ने अपने इन लड़ाकों को नेपाली सेना में शामिल कराने की मांग भी की थी.

नेपाल में 13 फरवरी 1996 का विद्रोह-Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians

13 फरवरी 1996 को नेपाल में विद्रोह ने देश में एक दशक लंबे माओवादी विद्रोह की शुरुआत को चिह्नित किया। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने नेपाल में कम्युनिस्ट गणराज्य की स्थापना के लक्ष्य के साथ विद्रोह शुरू किया।

माओवादियों के प्राथमिक लक्ष्य सरकारी संस्थान, पुलिस स्टेशन और राज्य सत्ता के अन्य प्रतीक थे। उन्होंने अपने आंदोलन को वित्तपोषित करने के तरीके के रूप में निजी व्यवसायों पर भी हमला किया, जिनमें धनी व्यक्तियों के स्वामित्व वाले व्यवसाय भी शामिल थे। विद्रोह तेजी से नेपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में फैल गया, माओवादी ताकतों ने क्षेत्र के बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।

नेपाली सरकार ने माओवादियों का मुकाबला करने के लिए सेना को तैनात करते हुए बल का जवाब दिया। संघर्ष तेजी से बढ़ा, दोनों पक्षों ने मानवाधिकारों का हनन और अत्याचार किया। विद्रोह के कारण नागरिकों, माओवादी लड़ाकों और सरकारी सैनिकों सहित 17,000 से अधिक लोगों की मौत हुई।Nepal News Prime Minister took the responsibility of killing 5000 civilians

2006 में, वर्षों की बातचीत और विरोध के बाद, माओवादियों ने नेपाली सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के परिणामस्वरूप एक नई अंतरिम सरकार का गठन हुआ और माओवादी लड़ाकों का नेपाली सेना में एकीकरण हुआ। माओवादियों ने बाद में चुनावों में भाग लिया और देश की संविधान सभा में बहुमत हासिल किया, जिसे एक नया संविधान तैयार करने का काम सौंपा गया था।

राजनीतिक प्रक्रिया में माओवादियों की भागीदारी ने 2008 में नेपाल में एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना की, जिससे देश की लंबे समय से चली आ रही राजशाही समाप्त हो गई। पूर्व माओवादी विद्रोही अब नेपाल में मुख्यधारा की राजनीति में भाग लेते हैं, और विद्रोह के बाद के वर्षों में देश ने अपेक्षाकृत स्थिरता का आनंद लिया है।

 


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