May 21, 2024
how to get bail from police station

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भारत में जमानत के अधिकार-  पुलिस स्टेशन से जमानत कैसे मिलती है ?

भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 436 अपराधियों के लिए “बेलयाबल अपराध” के अधिकार और उन्हें जमानत देने के बारे में है। इससे आरोपित व्यक्ति को जिला पुलिस थाने द्वारा ही जमानत (बेल) प्रदान की जा सकती है, बिना आरोपी को न्यायालय के सामने पेश किए। भारतीय कानून में कुछ ऐसे अपराध होते हैं जिन्हें “बेलयाबल” अपराध कहा जाता है और जिनमें पुलिस थाने द्वारा भी जमानत (बेल) दी जा सकती है। ये अपराध गंभीर नहीं होते होते हैं, और इनमें आरोपी को पुलिस थाने में ही जमानत दी जा सकती है।

नीचे दी गई हैं धारा 436 की स्पष्टीकरण:

  1. बेलयाबल अपराध: बेलयाबल अपराध वे अपराध होते हैं जो प्रकृति में कम गंभीर होते हैं और जिनके लिए कानून आरोपित को जमानत देने की संभावना प्रदान करता है। बेलयाबल अपराधों में, आरोपी को जमानत का अधिकार मिलता है, जिसे वह स्वतंत्र अधिकार के रूप में अभिग्रहण कर सकता है।
  2. जिला पुलिस थाने द्वारा जमानत देना: यदि कोई व्यक्ति बेलयाबल अपराध के लिए गिरफ्तार होता है, तो उसको जिला पुलिस थाने द्वारा भी जमानत देने का अधिकार होता है। पुलिस को गिरफ्तारी के समय या जांच के प्रारंभिक चरण में ही जमानत प्रदान करने की विधिवत स्वतंत्रता होती है।
  3. जमानत की शर्तें: जमानत देते समय, पुलिस आरोपित पर कुछ शर्तें लगा सकती है, जैसे आग्रह प्रदान करना या बंधन, या आरोपी के अगले जांच या न्यायिक उपस्थिति के लिए उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना।
  4. गैर-जमानती अपराध: इसके विपरीत, गैर-जमानती अपराधों के लिए, आरोपित को जिला पुलिस थाने द्वारा ही जमानत नहीं दी जा सकती। ऐसे अपराध के लिए, आरोपी को न्यायालय के सामने जमानत के लिए आवेदन करना होता है। न्यायालय तब फैसला करेगा कि क्या जमानत देने के लिए अधिकार है, जिसमें अपराध की प्रकृति, गंभीरता, और आरोपी की भागिदारी के संभावना जैसे विभिन्न कारकों को ध्यान में रखा जाता है।

यह जरूरी है कि आप बेलयाबल अपराधों के लिए भी जमानत की प्रक्रिया के बारे में जानकारी रखें। अगर किसी आरोपी को जमानत न मिले या किसी गैर-जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया हो, तो उसे संबंधित CrPC की धाराओं के तहत न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, जैसे कि धारा 437 या धारा 439, अपराध की प्रकृति और न्यायिक क्षेत्र के अनुसार।

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जमानत के अधिकार भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) के कुछ धाराओं में स्थापित किए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं धारा 437 और धारा 439:

  1. धारा 437 – जमानत की अनुमति ज्ञाप्ति करने का अधिकार: यदि कोई व्यक्ति गैर-जमानती अपराध के आरोपी है, तो वह पुलिस थाने में ही जमानत प्राप्त कर सकता है। गैर-जमानती अपराध आमतौर पर कम गंभीर अपराध होते हैं और इसमें आरोपी को बिना अदालत के पेश किए ही जमानत दी जा सकती है।
  2. धारा 439 – उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय की विशेष शक्तियां: यदि कोई व्यक्ति गैर-जमानती अपराध के आरोपी है और उसे जमानत चाहिए, तो वह उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय के सामने जमानत की याचिका दाखिल कर सकता है। इसमें अदालत को विभिन्न कारणों को ध्यान में रखते हुए जमानत देने का अधिकार होता है, जैसे कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता, आरोपी की भागिदारी का संभावना, साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ का संभावना, और आरोपी का पूर्वावस्था।

यहां ध्यान देने योग्य है कि जमानत आपके अपराध और विवाद के संदर्भ में अनुसार अलग-अलग होती है और जमानती अधिकार का उपयोग विधिवत तरीके से किया जाना चाहिए। अपने समस्या के संदर्भ में विधिवत जानकारी के लिए, एक योग्य वकील से परामर्श लेना बहुत महत्वपूर्ण है जो भारतीय कानूनी प्रक्रिया और विधि सिद्धांतों के बारे में जानकार हैं।


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